Tuesday, January 6, 2009

सुबह हो गई मामू!

यूँ तो रोज एक नया दिन आता है, नई उमंग और नए वादों के साथ, परन्तु नव-वर्ष की बेला की बात ही निराली है। एक साधारण दिन को हम असाधारण तरीके से मनाते है, पलकें बिछाये इसका इन्तजार करते है और इसके गुजर जाने पर कुछ ही क्षण में भूल भी जाते है। ऐसा ही कुछ होता है हमारे न्यू इयर रेसोलुशन्स के साथ। लिस्ट बनाओ, सोचो, विचार करो, और ले लो ढेर सारे रेसोलुशन्स, मानो परमदयालु ईश्वर ने हमे एक और मौका दे दिया हो, एक अलग जिंदगी जीने का, एक अलग तरह के व्यक्तित्व के स्वामी बनने का। हम भी बच्चो के समान न जाने क्या क्या सपने संजोये ख्वाबो की दुनिया में हिल्लोरे लेने लगते है, नव-वर्ष की बेला आते आते। सुबह जल्दी उठेंगे, नियमित व्यायाम करेंगे, एक हफ्ते में तीन से ज्यादा फिल्म्स नही देखेंगे, और भी न जाने कैसे कैसे रेसोलुशन्स ले लेते है।

बात सिर्फ़ रेसोलुशन्स लेने तक ही सिमित रहती तो कितना अच्छा था, परन्तु हम उस से और भी दो कदम आगे जाकर उनके पूरा होने के बाद के कार्यक्रम की भी कल्पना कर लेते है। चूँकि हम सुबह जल्दी उठने लगेंगे तो, नास्ता करने की भी आदत पड़ जायेगी। नियमित व्यायाम के लिए जिम की मेम्बरशिप भी तो चाहिए होगी। यदि फिल्म्स नही देखेंगे तो समय व्यतीत करने के लिए मेग्जींस चाहिए होंगी, इत्यादी इत्यादी इत्यादी।

अरे मेरे मूरख मन! तू जो इतना संयमशील होता तो यह सब ख्वाब पिछले ही बरस ना पूरे हो जाते। उठ जाग और धारण कर अपने नियमित व्यव्हार को। सुबह जल्दी उठना एक मिथ्या है, देर रात तक इन्टरनेट पर वक्त गुजारना ही सत्य है। नियमित व्यायाम करना तेरी रगो में कहाँ, तू तो आलस की प्रतिमा है, मान ले इस सत्य को और लग जा परमसुखदेय आलस्य के पूजन में। यह नव-वर्ष तो प्रतिवर्ष आएगा, और अगर तू इस बार ही सारे रेसोलुशन पूरण कर लेगा तो अगले वर्ष क्या करेगा? कम से कम भविष्य की तो सोच। सपनो की दुनिया से निकल हे मूड-मति! और जाग। देख सुबह हो गयी है, नव-वर्ष बेला जा चुकी है।

मेरा मन तो बार बार यही कह रहा है और आपका?

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